Wednesday, September 19, 2018

कार्टून: बाबा के ब्रांड में खास कलेक्शन

पैसे की कमी से जूझ रही पाकिस्तान की सरकार अब पैसा इकट्ठा करने के लिए प्रधानमंत्री आवास की लग्ज़री कारें और हेलिकॉप्टर्स बेच रही है.
इसके लिए प्रधानमंत्री आवास के लॉन में लग्जरी कारों की बोली लगाई गई. बुलेट प्रूफ जीप और बड़ी लग्जरी कारों ने कई खरीदारों को आकर्षित किया लेकिन सरकार को मनमुताबिक नतीजे नहीं मिले.
नीलामकर्ताओं ने बताया कि सरकार को इस नीलामी से एक करोड़ 60 लाख डॉलर आने की उम्मीद की थी लेकिन सिर्फ 6 लाख डॉलर ही आ पाए.
अब कर्ज़ के संकट से निकलने के लिए सरकार आगे और भी कई चीज़ों की नीलामियां करेगी.
इस कोशिश के तहत मंत्रीमंडल के इस्तेमाल के लिए रखे गए चार हेलीकॉप्टर भी नीलाम होने वाले हैं. बोली लगाने वालों ने इनमें काफी दिलचस्पी दिखाई है. ये नीलामियां इस महीने के अंत में होगी.
चर्चा ये भी है कि सरकार प्रधानमंत्री आवास की आठ भैंसों को भी बेचेगी. लेकिन, सरकार की तरफ से अभी इस पर कुछ नहीं कहा गया है.
इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के सहयोगी नइमुल हक़ ने भैंसों की नीलामी को लेकर एक ट्वीट करके सबको चौंका दिया था.
उन्होंने लिखा था कि कारों की नीलामी के बाद 8 भैंसों की नीलामी भी की जाएगी जो प्रधानमंत्री आवास पर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की खाना बनाने संबंधी जरूरतों के लिए रखी गई थीं.
इमरान ख़ान इसी साल जुलाई में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं. इसके बाद से उन्होंने किफ़ायत बरतने का अभियान चलाया है. हालांकि, अलोचकों का ये भी कहना है कि ये अभियान हकीकत से ज्यादा दिखावा है.
वहीं, पिछले महीने इमरान ख़ान तब निशाने आ गए थे जब वो ट्रैफिक जाम से बचने के लिए हेलिकॉप्टर से अपने दफ़्तर जा रहे थे.
कुछ लोगों का कहना है कि सरकार की कारों की नीलामी नई बात नहीं है, ऐसा हमेशा होता है. बस इमरान ख़ान की सरकार इसका प्रचार कर रही है.
सोमवार को 100 से ज़्यादा कारों की नीलामी की गई जिनमें से आधी लग्जरी कारें थीं. हालांकि, इनमें सिर्फ 62 कारें ही बिक पाई थीं.
नीलाम होने वाली कारों में दो सबसे मर्सडीज मेबैच एस-600एस महंगी कारें थीं जो साल 2016 में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ श़रीफ़ के समय खरीदी गई थी.
जब इन कारों के लिए 13 लाख डॉलर (प्रत्येक) की शुरुआती बोली रखी गई तो वहां बोली लगाने के लिए पहुंचे क़रीब 500 लोग हंसने लगे.
इन दोनों कारों के लिए किसी ने बोली नहीं लगाई. इसके अलावा सात बीएमडब्ल्यू और 1993 की 14 मर्सडीज बेंज़ एस-300 भी नहीं बिकीं.
नीलामी के लिए आई एक और महंगी कार थी टोयोटा 2015 बुलेट प्रूफ लैंड क्रूज़र जिसकी क़ीमत क़रीब 2.6 करोड़ पाकिस्तानी रुपये थी.
कुछ कारें लग्ज़री कार नहीं बल्कि सामान्य कारें थीं और 80 के दशक में ली गई थीं.
रावलपिंडी के अफ़जल ने दो कारें खरीदी. उनमें में से एक सबसे कम दाम में ख़रीदी गई है. इनमें से एक सुज़ुकी मेहरान कहलानी वाली 2005 की एक हैचबैक मॉडल है जिसे उन्होंने 2.95 लाख रुपये में खरीदा.
अफ़जल ने बताया कि उन्होंने ये कार अपने बेटे के लिए ख़रीदी है. वो कहते हैं, "इसके लिए ज़्यादा पैसे देने से मुझे गुरेज नहीं. अंत में ये पैसा सरकारी खजाने में ही जाना है और यही हमारे प्रधानमंत्री चाहते हैं."
कराची से आए शख़्स ने चार 2005 आर्म्ड मर्सीडीज़ जीप में से एक ख़रीदी. उन्होंने बताया कि उनके बॉस फार्मास्यूटिकल कंपनी से हैं और वो किसी भी क़ीमत पर लग्जरी गाड़ी चाहते हैं.
बोली लगाने के लिए आए लोगों में से कई को सरकार के चार हेलीकॉप्टर और आठ भैंसों में भी दिलचस्पी थी जिनकी जल्द ही नीलामी की जा सकती है.
कर्ज़ से निपटने के लिए लग्ज़री कारों को बेचने के अलावा पाकिस्तान की सरकारी स्वामित्व वाली इमारतों को विश्वविद्यालयो में तब्दील करने और सरकारी कार्यालयों में एयर कंडिशनिंग में कटौती करने की भी योजना है.
अपार्टमेंट देव आनंद संदिकर नाम के व्यक्ति का है, जो पाकिस्तान की 'महाराष्ट्र पंचायत' के मुखिया हैं.
यह पाकिस्तान में रह रहे मराठियों का समुदाय है, जिनकी संख्या बहुत कम है.
अपार्टमेंट में एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया है. रंग-बिरंगी साड़ियों और सोने के गहने पहने ये महिलाएं ज़मीन पर बैठ कर मोदक बना रही हैं.
ये मोदक उनके सबसे प्रिय त्योहार गणेश चतुर्थी के लिए तैयार किए गए हैं.
देव आनंद की पत्नी मलका कहती हैं, "भगवान गणेश के भोग के लिए हम लोगों ने कई पकवान बनाए हैं, पर मोदक उनका सबसे प्रिय है."
"इसे पारंपरिक तौर पर चावल के आटे, नारियल, गुड़ और सूजी से तैयार किया जाता है. लेकिन आज इसमें कई प्रयोग किए जा रहे हैं. जैसे चॉकलेट मोदक, वनीला फ़्लेवर मोदक आदि..."लका ने घर को बेहद ख़ूबसूरती से सजाया है. एक ख़ास खूशबू से लोगों का स्वागत किया जा रहा है. त्योहार के पहले देव आनंद थोड़े परेशान थे. कुछ साल पहले तक वो भगवान गणेश की मूर्ति दुबई के रास्ते भारत से मंगवाते थे.
वो कहते हैं, "मूर्ति हम लोगों के लिए बेहद ज़रूरी है. यह त्योहार भगवान गणेश को समर्पित है. इसलिए हम चाहते हैं उनकी खूबसूरत से खूबसूरत मूर्ति मंगवाई जाए."
"हालांकि आसपास भी मूर्तियां बनाई जाती हैं, लेकिन इन मूर्तियों की फ़िनिसिंग वैसी नहीं होती जैसी भारत की होती है."
इस साल समय पर मूर्ति भारत से पाकिस्तान नहीं पहुंच पाई. देव आनंद ने फिर दुबई में रहने वाले भाई को अपनी परेशानी बताई. उनका भाई गणेश की मूर्ति लेकर खुद दुबई से पाकिस्तान पहुंचा.
मूर्ति के पहुंचने के बाद विधि-विधान से पूजा की शुरुआत हुई. भगवान गणेश पर मोदक और मोतीचूर के लड्डू चढ़ाए गए. इसके बाद समुदाय के लोग मूर्ति लेकर नाचते-गाते कराची के रत्नेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे. वहां मूर्ति की विधिवत स्थापना हुई.
रत्नेश्वर महादेव मंदिर क्लिफ़टन इलाक़े में समुद्र के किनारे स्थित है. मान्यता है कि यह मंदिर सैंकड़ों साल पुराना है. गणेश चतुर्थी के दौरान मुख्य कार्यक्रम का आयोजन इसी मंदिर में होता है.
देव आनंद कहते हैं, "हम लोग यहां करीब 500 की संख्या में जुटते हैं. मराठाओं के अलावा दूसरे हिंदू समुदाय के लोग भी जश्न में शामिल होते हैं. कोई भी इसमें शामिल हो सकता है, किसी तरह की रोक-टोक नहीं होती है."
मंदिर के एक बड़े हॉल में गणेश की मूर्ति स्थापित की जाती है. यहां के हॉल को भी ख़ूबसूरती से सजाया गया है, जहां शाम को सैंकड़ों लोग जुटते हैं.
मंदिर के पुजारी महाराज रवि रमेश गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं. उन पर कई तरह के फल-फूल चढ़ाए जाते हैं. उनकी दूध और शहद से अभिषेक किया जाता है.
महाराज रवि रमेश कहते हैं, "हम हर साल इस त्योहार को धूमधाम से मनाते हैं. पूरे सिंध प्रांत से लोग यहां आते हैं."
जो भी लोग यहां आते हैं, सभी एक-एक कर गणेश की पूजा करते हैं. रातभर यह चलता रहता है.
अगले दिन शाम एक बार फिर यहां लोगों का जुटते है और गणेश की मूर्ति को सभी मिलकर अरब सागर में विसर्जित करते हैं.
इस दौरान जयकारे लगाए जाते हैं, गीत गाए जाते हैं. लोग नाचते हैं और मूर्ति विसर्जन के बाद यह त्योहार ख़त्म हो जाता है.

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